रायपुर:-छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज के प्रांताध्यक्ष चेतन भारती की ओर से दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पेंशनरों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। माननीय न्यायाधीश राकेश मोहन पाण्डेय ने 15 अप्रैल 2026 को दिए निर्णय में राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) एवं 49(8) के तहत पेंशनरों को राहत प्रदान की है।
चेतन भारती ने बताया कि वे लंबे समय से मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ शासन को पेंशनरों की मांगों को लेकर पत्राचार करते रहे, लेकिन शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने 12 अगस्त 2021 को आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के साथ उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की।
न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) के अंतर्गत पेंशन भुगतान के लिए किसी अतिरिक्त आपसी सहमति की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने दोनों राज्यों को अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
फैसले में कहा गया कि पांचवें वेतनमान के तहत 1 जनवरी 1996 से पूर्व सेवानिवृत्त पेंशनरों को उसी तिथि से पेंशन लाभ दिया गया था। इसी आधार पर छठवें वेतनमान में 1 जनवरी 2006 से पूर्व सेवानिवृत्त पेंशनरों को 1 सितंबर 2008 से पेंशन दिए जाने के कारण 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक के 32 माह का एरियर भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
इसी प्रकार सातवें वेतनमान में 1 जनवरी 2016 से पूर्व सेवानिवृत्त पेंशनरों को 1 अप्रैल 2018 से पेंशन लाभ दिए जाने के कारण 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक के 27 माह का एरियर भी देय माना गया है।
न्यायालय ने दोनों एरियर राशि का भुगतान 120 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है।
इस फैसले को प्रदेश के हजारों पेंशनरों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स फेडरेशन एवं छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज, रायपुर (छ.ग.)
प्रांतीय उपाध्यक्ष हरिशंकर सिंह अंबिकापुर,बी.एल. चन्द्राकर सारंगढ़, बैशाखू राम साहू राजिम, रविशंकर साहू नवापारा, आर.एल. देव, नगरी, गालव प्रसाद साहू बालोद, नंदकुमार वर्मा गरियाबंद, के.आर. जनार्दन बिलासपुर, श्याम बिहारी अग्रवाल रायपुर, रामलोचन शर्मा भाटापारा, हीरालाल वर्मा पाटन,आदि ने हर्ष व्यक्त किया।









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