बलौदाबाजार:-जिले के कसडोल क्षेत्र में करीब 2 साल पहले हुई गैंद राम यादव की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. तीन सगे भाई रवि रजक, राजेंद्र रजक और रोहित रजक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. अदालत ने कहा कि यह घटना आकस्मिक नहीं, बल्कि सामूहिक हिंसा का नतीजा थी.
नए साल की रात शुरू हुआ था विवाद:-1 जनवरी 2024 की रात ठाकुरदिया गांव में शराब दुकान के पास गैंद राम यादव, नोहर सिंह और हेमराज पहुंचे थे. वहीं चार लोग रवि, राजेंद्र, रोहित और कमलेश साहू पहले से मौजूद थे. शुरुआत में हल्की कहासुनी हुई, लेकिन देखते ही देखते विवाद हिंसा में बदल गया.
कैसे हुआ हमला?:-गवाहों के अनुसार, रवि रजक ने सबसे पहले गैंद राम पर हमला किया. फिर सभी आरोपियों ने मिलकर ईंट-पत्थर फेंकने शुरू कर दिए. गैंद राम के सीने पर जोरदार पत्थर लगने से वह गिर पड़े. गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. नोहर और हेमराज किसी तरह भागकर अपनी जान बचा पाए.
पुलिस ने क्या किया?:-परिजनों और घायलों की शिकायत पर पुलिस ने उसी रात FIR दर्ज कर ली. घटनास्थल से खून के निशान, ईंटों के टुकड़े और पत्थर जैसे सबूत मिले. पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान पेश किया. कुल 18 गवाहों के बयान दर्ज किए गए.
अदालत में क्या हुआ?:-सबसे मजबूत गवाही दो प्रत्यक्षदर्शियों नोहर सिंह ध्रुव और हेमराज ध्रुव की रही. उन्होंने बताया कि झगड़ा अचानक नहीं हुआ था. आरोपियों ने मिलकर हमला किया. गिरने के बाद भी वार जारी रहा. वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी सीने में भारी चोट की पुष्टि हुई, जो पत्थर लगने से मेल खाती थी. अदालत ने इसे हत्या का स्पष्ट मामला माना.
कोर्ट का फैसला:-अदालत ने तीनों को धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई. साथ ही 10 हजार रु जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा होगी. अदालत ने कहा कि यह हत्या सामूहिक हिंसा का परिणाम थी और आरोपी जानबूझकर हमले के इरादे से आए थे.
केस शुरू से मजबूत था, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह मेल खाते थे अदालत ने मजबूत फैसला दिया है- लोक अभियोजक थानेश्वर प्रसाद वर्मा उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय समाज को संदेश देता है कि सामूहिक हिंसा को अदालत कभी नजरअंदाज नहीं करती.










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