गांधी जयंती एवं दशहरा 02 अक्टूबर 2025 अजीब सा दिनांक है
इस बार इसी दिन दशहरा और गांधी जयंती का विशेषांक है
एक हिंसा, अधर्म का भक्षक
एक अहिंसा, देश का रक्षक
फिर भी इस आधुनिक युग में
जहाँ लोग हैं सिर्फ मनोरंजन के शोषक
नैतिकता, औपचारिकता निभाई जाएगी
दिखावे की “गांधी जयंती” मनायी जाएगी
मेला, उत्साह, तो वहाँ देखा जाएगा जहाँ ”दशहरा”मनाया जाएगा
वर्तमान युग में “गांधी जी”के आदर्शों को जलाया जाता है
पर “रावण” के बुराई को अपनाया जाता है
हमें रावण का पुतला नहीं उसके बुराई को मन से जलाना है
वास्तव में मानव होने का परिचय देना है
तब कहीं गांधी जयंती सफल होगी
इस “गांधी जयंती” के दिन, करें यह संकल्प
देश, समाज में राक्षस हमें नहीं लाना है
क्योंकि, अभी के रावण सीता हरण ही नहीं
बहू बेटियों को नोंच के फेंकने वाला है इसलिए देश के बड़े, बूढ़े और युवा जागो फिर एक बार
हम सभी गांधीवाद को अपनाएँ
सबकी बहू बेटियों को सम्मान की नजर से देखे
02 अक्टूबर 2025,भूले न संकल्प हमारा हरगिज
यदि गांधी जयंती मनाना है
तो बापू के आदतों के साथ ही मनाना है।
हमें गाँधीवाद को अपनाना है।
स्वरचित कविता
श्रीमती-एच. आर. पटेल व्याख्याता (हिन्दी) सेजेस पवनी सारंगढ़ – बिलाईगढ़ (छ. ग.)










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