बिलाईगढ़-जनपद पंचायत बिलाईगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत भंडोरा में आदर्श आचार संहिता के दौरान पंचायत फंड से 2 लाख 73 हजार 100 रुपये की राशि निकाले जाने की शिकायत पर प्रशासनिक स्तर पर जांच नहीं कराने का निर्णय सामने आया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सारंगढ़ बिलाईगढ़ द्वारा इस मामले में जांच को अनावश्यक बताते हुए प्रकरण को कलेक्टर जनदर्शन से विलोपित करने की अनुशंसा की गई है। इस निर्णय के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिना प्रारंभिक जांच के किसी शिकायत को खारिज करना उचित है।
जानकारी के अनुसार रूपेश श्रीवास ने जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत भंडोरा में पंचायत चुनाव के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता के समय पंचायत फंड से 2,73,100 रुपये की राशि निकाली गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान किसी भी प्रकार का वित्तीय व्यय बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नहीं किया जा सकता। ऐसे में पंचायत फंड से राशि निकाले जाने का मामला नियमों के उल्लंघन की आशंका पैदा करता है।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में यह भी कहा था कि उक्त राशि किस मद में और किस उद्देश्य से निकाली गई, इसकी पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह है। उन्होंने संदेह जताया कि यह निकासी संभावित रूप से चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से भी की गई हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से डाउनलोड की गई भुगतान संबंधी जानकारी की प्रतियां भी आवेदन के साथ संलग्न की थीं।
रूपेश श्रीवास ने बताया कि उन्होंने इस मामले में पहली बार 8 सितंबर 2025 और 11 अगस्त 2025 को ऑफलाइन जिला कलेक्टर को आवेदन दिया था। इसके बाद 16 सितंबर 2025, 28 अक्टूबर 2025 और 18 नवंबर 2025 को कलेक्टर जनदर्शन में भी शिकायत प्रस्तुत की गई।
मामले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सारंगढ़-बिलाईगढ़ द्वारा कलेक्टर को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने केवल ई-ग्राम स्वराज पोर्टल में प्रदर्शित भुगतान राशि का योग निकालकर शिकायत की है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता ने संबंधित कार्यों का भौतिक सत्यापन नहीं किया है और केवल पोर्टल के भुगतान के आधार पर शिकायत दर्ज कर दी है।
सीईओ ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि ऐसी स्थिति में जांच करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे प्रशासन का अनावश्यक समय व्यर्थ होगा। इसलिए इस प्रकरण को कलेक्टर जनदर्शन से विलोपित करने की अनुशंसा की गई है।
हालांकि इस निर्णय को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है। प्रशासनिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि किसी नागरिक द्वारा सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर सवाल उठाया जाता है, तो कम से कम दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच कर लेना उचित माना जाता है।अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही करेगी या यह मामला भी दबा दी जायेगी।




















Users Today : 16
Users Yesterday : 31
Users Last 7 days : 1487
Users Last 30 days : 2533